Martand Pachak Churn

Martand Pachak Churn

INGREDIENTS

• Sendha Namak &  Kala Namak

• Anar Dana &  Saunf

• Kali Mirch &   Hing

• Amlavet &  Navsadar

• Nimbu &  Jira

• Saunth

• Peepal





ABOUT

Martand churn sharpens and regulates the appettite ,helps in digestion ,encourages assimilation ,free the system from impurity, produce free and healthy motion and tones the muscular power such as no other medicine does .Martand churn, is the only Ayurvedic Product that has been found by experience which mixes freely with the saliva and gastric juice and there by promotes digestion.

For persons in delicate health and for aged person whose power of digestion have been  impaired , martand churn is pronounced to be the safest ,surest and simplest Ayurvedic Product that has yet been discoverd either in the east or the west.

Martand churn cures constipation and relieves loose motion and gives tone to the digestive organs,relieves pain.It is the best Ayurvedic Product for dyspepsia.

DIRECTIONS FOR USE:

  1.  For indigestion,dysepesia loss of appetite bellyache and for other usual stomach complaints one gram Martand Churn should be used at 4 hourly interval with luke      warm water .The diet should be light.
  2. During the cholera and acute gastroentertitis epidemics one gram Martand Churn should be taken with 1/2 oz of freshwater by every family member according to age as prophylactic measure.

 For bites of wasp etc Martand churn acts as specific remedy when applied locally with saturated solution in water rubbed on the site of bite.  



मारतंड चूर्ण

तमाम सुलेमानी नमको, चूर्ण , सॉल्ट और पाचक दवाईयों से गुण और जायके में अच्छा है व हाजमें का अचूक रामबाण है | हमारा 'मारतंड चूर्ण' अपने विशिष्ट गुण के कारण ही प्राय: सभी प्रान्तों में काफ़ी ख्याति पा चुका है | 
'मारतंड चूर्ण,' मंदाग्नि , बदहज़मी, पेट का अफ़रा, भूख की कमी, अतिसार, वायुगोला, वायु का साफ न खुलना, दातों के दर्द व चींटा चींटी तथा बर्र के काटने पर लाभ करता है | 

सेवन विधि

मंदाग्नि  बदहज़मी, पेट दर्द, खट्टी डकारों का आना या भूख की कमी में एक ग्राम 'मारतंड चूर्ण ' गुनगुने पानी के साथ चार-चार घण्टे पर सेवन करना चाहिए | 
हैज़े की दिनों मेंं घर के हर सदस्य को सुबह कुल्ला दातून करने के बाद और सख़्त बदहज़मी में चूर्ण तीन बार खाना चाहिए |
कब्ज की शिकायत में सोते वक्त में 2 ग्राम 'मारतंड चूर्ण' खाकर गुनगुना पानी पीना चाहिए | 
चींटा, बर्र आदि के काटने पर इसे पानी में मिलाकर लगानें से लाभ होता है | दातों और मसूड़ों में दर्द हो तो इसे मल कर कुल्ला करना चाहिए | भोजन करने के बाद 1 ग्राम 'मारतंड चूर्ण' ठंडे पानी के साथ रोज सेवन किया जाय तो खाया हुआ भोजन भलीभाँति पचता है |

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